
आधुनिक अवधारणा के अनुरूप ऐसे खंदकयुक्त पशु-बाड़ों (Moated Enclosures) का विकास किया गया है, जहाँ आगंतुक बिना किसी अवरोध के पशुओं को देख सकते हैं।
आधुनिक अवधारणा के अनुरूप ऐसे खंदकयुक्त पशु-बाड़ों (Moated Enclosures) का विकास किया गया है, जहाँ आगंतुक बिना किसी अवरोध के पशुओं को देख सकते हैं। और पढ़ें
चार संकटग्रस्त प्रजातियों—एशियाई सिंह, बंगाल टाइगर, भारतीय गैंडा एवं संगाई हिरण—का संरक्षण प्रजनन सफलतापूर्वक किया गया है।
बाघ, ब्राउ-एंटलर्ड हिरण, लायन-टेल्ड मकाक, नीलगिरि लंगूर, चार सींग वाला मृग, भारतीय गैंडा, जंगली गधा...
बाघ, ब्राउ-एंटलर्ड हिरण, लायन-टेल्ड मकाक, नीलगिरि लंगूर, चार सींग वाला मृग, भारतीय गैंडा, जंगली गधा, भारतीय सिंह, हिमालयी काला भालू, मगरमच्छ, तीतर, एमू, रोजी पेलिकन, पेंटेड स्टॉर्क, सारस क्रेन आदि अनेक प्रजातियों का पूर्व में सफल प्रजनन किया जा चुका है। और पढ़ें
बीस काले हिरणों (Black Bucks) को असोला वन्यजीव अभयारण्य में प्राकृतिक पर्यावास में छोड़ा गया।
चिंपैंजी, हमाड्रियास बैबून, अफ्रीकी गैंडा, जापानी भूरा भालू, ईलैंड, केप भैंसा, वाटरबक आदि...
चिंपैंजी, हमाड्रियास बैबून, अफ्रीकी गैंडा, जापानी भूरा भालू, ईलैंड, केप भैंसा, वाटरबक आदि विदेशी प्रजातियों का भी प्राणी उद्यान में सफलतापूर्वक प्रजनन हुआ है। और पढ़ें
संगाई हिरण, काले हिरण तथा सांभर हिरण को देश के अन्य प्राणी उद्यानों को विनिमय एवं उपहार के रूप में उपलब्ध कराया गया है।
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में सफेद बाघ का सफल प्रजनन किया गया है तथा वर्ष 1987 से अब तक देश के 11 विभिन्न प्राणी उद्यानों को सफेद बाघ उपलब्ध कराए गए हैं।
कृत्रिम तालाबों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं तथा इन जलाशयों में उनका प्रजनन भी हुआ है।
आगंतुकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में व्यापक सुधार एवं विकास किया गया है तथा यह प्रक्रिया निरंतर जारी है।
वर्ष 1990 के दशक में लगभग 6–7 लाख वार्षिक आगंतुकों की संख्या बढ़कर वर्ष 2015-16 में लगभग 27 लाख हो गई...
वर्ष 1990 के दशक में लगभग 6–7 लाख वार्षिक आगंतुकों की संख्या बढ़कर वर्ष 2015-16 में लगभग 27 लाख हो गई। चालू वर्ष में आगंतुकों की संख्या पिछले सभी रिकॉर्ड से अधिक रहने की संभावना है। और पढ़ें
प्राणी उद्यान के अंदर की सड़कों का उन्नयन किया गया है।
संरक्षण एवं शैक्षिक कार्यक्रम के अंतर्गत आगंतुक क्षेत्रों में शैक्षिक एवं व्याख्यात्मक साइनेज स्थापित किए गए हैं।
प्रारंभ में राष्ट्रीय प्राणी उद्यान की भूमि पर प्रोसोपिस का व्यापक फैलाव था। यह एक विदेशी प्रजाति थी, जिसे दिल्ली रिज के बंजर एवं पथरीले क्षेत्र को ढकने के उद्देश्य से लगाया गया था और बाद में यह पूरे दिल्ली क्षेत्र, जिसमें राष्ट्रीय प्राणी उद्यान भी शामिल है, में फैल गई।
पशुओं के साथ-साथ विश्व के विभिन्न भागों से विभिन्न पादप प्रजातियाँ भी राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में लाई गईं।
कुल 505 पादप प्रजातियों की पहचान एवं उनका विवरण तैयार किया गया तथा इन्हें Plants of NZP नामक पुस्तक में संकलित किया गया। इनमें से अधिकांश पौधे नए लगाए गए थे।
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान आज घनी वनस्पतियों से आच्छादित है और प्राकृतिक स्वरूप प्रस्तुत करता है।
प्रत्येक वर्ष नए पौधों का वृक्षारोपण किया जाता है।
वन महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसके अंतर्गत व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जाता है। संबंधित वर्ष में राष्ट्रीय प्राणी उद्यान परिसर में 6,222 पौधे लगाए गए।
इसके अतिरिक्त, प्राणी उद्यान परिसर में मौसमी फूलों से सुसज्जित लगभग 1,000 फ्लावर पॉट्स प्रदर्शित किए गए।

उचित सीवरेज प्रणाली के रखरखाव के माध्यम से राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में जलभराव की समस्या में सुधार किया गया।
प्राणी उद्यान अस्पताल का उन्नयन किया गया।
वर्ष 2015-16 में राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में कुल आगंतुकों की संख्या पहली बार 27 लाख के आंकड़े को पार कर गई...
वर्ष 2015-16 में राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में कुल आगंतुकों की संख्या पहली बार 27 लाख के आंकड़े को पार कर गई। यह एक सर्वकालिक रिकॉर्ड था तथा वर्ष 2014-15 में आए 22,36,850 आगंतुकों की तुलना में लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। और पढ़ें
आगंतुक एवं सेवा वाहनों को अलग-अलग करने तथा सुगम मार्गदर्शन एवं दिशा-निर्देशन (Way Finding) की व्यवस्था को पूरा किया गया।
निदेशक कार्यालय भवन का उन्नयन किया गया।
एक नए पक्षीशाला (Aviary) का निर्माण किया गया और इसे आगंतुकों के लिए खोला गया।
प्रवेश द्वार एवं प्राणी उद्यान अस्पताल में सीसीटीवी निगरानी प्रणाली स्थापित की गई।
जल शोधक एवं वॉटर कूलर स्थापित कर पेयजल सुविधाओं का उन्नयन किया गया।
मौजूदा आगंतुक सुविधाओं में सुधार एवं उन्नयन किया गया।
आगंतुक क्षेत्रों में दिशा-सूचक एवं शैक्षिक साइनेज स्थापित किए गए।
देशज पादप प्रजातियों के रोपण के माध्यम से हरित एवं प्राकृतिक वातावरण विकसित किया गया।
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान को पॉलीथीन एवं धूम्रपान-मुक्त क्षेत्र बनाया गया।
तितली उद्यान (Butterfly Park) का विकास किया जा रहा है।
जब्त एवं अधिहृत वन्यजीव ट्रॉफियों का विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर माननीय मंत्री की उपस्थिति में राष्ट्रीय प्राणी उद्यान परिसर में वैज्ञानिक तरीके से दहन किया गया।
प्रवेश शुल्क से प्राप्त राजस्व वर्ष 2014-15 में ₹855.04 लाख से बढ़कर वर्ष 2015-16 में ₹1,016.44 लाख हो गया, जो लगभग 17 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि थी।
वर्ष 2017-18 में आगंतुकों की संख्या 27.09 लाख तथा राजस्व संग्रह ₹1,218.80 लाख रहा। यह राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के इतिहास में उस समय तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड था।
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान को दिल्ली के 100 वर्षों (1911–2011) के अवसर पर हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा नई दिल्ली के 100 प्रतिष्ठित स्थलों/प्रतीकों (100 Icons) में शामिल किया गया।
10 जनवरी, 2012 को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) के सहयोग से राष्ट्रीय प्राणी उद्यान को वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ ज़ूज़ एंड एक्वेरियम्स (WAZA) की संस्थागत सदस्यता प्रदान की गई।
